Hindi Poetry on Life

Best Meaningful Hindi Poetry on Life

Friends, today we have written poetry on life, when we decide the journey of life, we do not know how to live this life, we forget how life is through poetry on life. .

तल्ख़ आबे ग़म के चखने वाले कम हैं अपनी जुरअत परखने वाले कम हैं फूलों के लिए हाथ बढ़ाते सब हैं काँटों पे पाँव रखने वाले कम हैं …..!!

क़ब्र की मिट्टी हाथ में लिए सोच रहा हूँ…लोग मरते हैं तो ग़ुरूर कहाँ जाता है….!!

इतने बेताब – इतने बेक़रार क्यों हैं..लोग ज़रूरत से ज़्यादा होश्यार क्यों हैं …मुँह पे तो सभी दोस्त हैं लेकिन  पीठ पीछे दुश्मन हज़ार क्यों हैं….

हर चेहरे पे इक मुखौटा है यारो  लोग ज़हर में डूबे किरदार क्यों हैंसब काट रहे हैं यहाँ इक दूजे को  लोग सभी दोधारी तलवार क्यों हैं….

सब को सब की हर इक खबर चाहिए लोग चलते फिरते अखबार क्यों हैं 

जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाय,शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर कर जिया जाए।

जब जलेबी की तरह उलझ ही रही है तू ए जिंदगी तो फिर क्यों न तुझे चाशनी में डुबा कर मजा ले ही लिया जाए…!!

लम्हों की खुली किताब है, जिंदगी ख्यालों और सांसों का हिसाब है, जिंदगी कुछ जरूरतें पूरी, कुछ ख्वाइशें अधूरी इन्ही सवालों के जवाब है जिंदगी…!!

ज़िंदगी तो सभी के लिए  एक रंगीन किताब है..फर्क बस इतना है कि कोई हर पन्ने को दिल से पढ़ रहा है और कोई दिल रखने के लिए पन्ने पलट रहा है।

न चादर बड़ी कीजिये,न ख्वाहिशें दफन कीजिये,चार दिन की जिन्दगी है,बस चैन से बसर कीजिये…

न परेशान किसी को कीजिये,न हैरान किसी को कीजिये,कोई लाख गलत भी बोले,बस मुस्कुरा कर छोड़ दीजिये…

न रूठा किसी से कीजिये,न झूठा वादा किसी से कीजिये,कुछ फुरसत के पल निकालिये,कभी खुद से भी मिला कीजिये…!!

जुड़े जिंदगी से लोग कुछ ऐसे, जो अब आदत सी बन गए हैं..

जरूरत बने थे कभी जिनकी, जिंदगी में जरूरी बन गए हैं..

निकल चले जो इस जिंदगी से, वो बीता कल अब बन गए हैं..

साथ चल रहे जो हर दिन में, हकीकत बन कर चल रहे हैं..

मंजिल भी उसकी थी रास्ता भी उसका था….. मैं अकेला था और काफिला भी उसका…हाथो में हाथ थम कर चलने की सोच भी उसकी थी…।

फिर रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था….आज क्यों अकेला हूँ दिल सवाल करता है. लोग तो उसके थे क्या खुदा भी उसका था….!!

तू अपनी खूबियां ढूंढ कमियां निकालने के लिए लोग है ना अगर रखना ही है कदम तो आगे रख पीछे खींचने के लिए लोग है ना सपने देखने ही है तो ऊंचे देख नीचा दिखाने के लिए लोग है ना अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का जलने के लिए लोग है…

ना अगर बनानी है तो यादें बना बातें बनाने के लिए लोग है, ना प्यार करना है तो खुद से कर दुश्मनी करने के लिए लोग है, ना रहना है तो बच्चा बनकर रह समझदार बनाने के लिए लोग है…

ना भरोसा रखना है तो खुद पर रख शक करने के लिए लोग है ना तू बस सवार ले खुद को आईना दिखाने के लिए लोग है ना खुद की अलग पहचान बना भीड़ में चलने के लिए लोग है ना तू कुछ करके दिखा दुनिया को बस कुछ करके दिखा तालियाँ बजाने के लिए लोग है ना..

अज्ञात

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *