Romantic Love Poetry & Poem in Hindi

Romantic Love Poetry in Hindi

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सुनो… यूँ “चुप” से न रहा करो,यूँ “खामोश” से जो हो जाते हो, तो दिल को “वहम” सा हो जाता है, कहीं “खफा” तो नही हो..??

कहीं “उदास” तो नही हो…?? तुम “बोलते” अच्छे लगते हो, तुम “लड़ते” अच्छे लगते हो, कभी “शरारत” से, कभी “गुस्से” से, तुम “हँसते” अच्छे लगते हो,सुनो… यूँ “चुप” से ना रहा करो।

हमने जो की थी मोहब्बत वो आज भी है,तेरे जुल्फों के साये की चाहत आज भी है,रात कटती है आज भी ख्यालों में तेरे,

दीवानों सी मेरी वो हालत आज भी है,किसी और के तसब्बुर को उठती नहीं.बेईमान आँखों में थोड़ी सी शराफत आज भी है। ?

देखा पलट के उस ने के हसरत उसे भी थी…हम जिस पर मिट गए थे मुहब्बत उसे भी थी..चुप हो गया था देख कर वो भी इधर उधर दुनिया से मेरी तरह शिकायत उसे भी थी..!

ये सोच कर अंधेरे मे गले से लगा लिया रातों को जागने की आदत उसे भी थी..वो रो दिया मुझ को परेशान देख कर उस दिन पता लगा के मेरी ज़रूरत उसे भी थी..

जो बदनाम थे कल तक, आज वो सुखनवर हो गए..जो थे कल तक बाहर, आज दिलों के अंदर हो गए

हम तो आज भी एक कतरा हैं रुके हुए पानी का,पर लोग देखते ही देखते, कतरे से समंदर हो गए..!!

हर फैसला कुबूल है तेरा तुझ सा कोई सितमगर नही,हर राह पर चलेंगे साथ-साथ हम सा कोई राहबर नहीं,

प्यार दे या सितम कर ना होंगे जुदा कभी तेरे साये से, छोड़ देंगे सारी कायनात को हमसा कोई तेरा तलबगार नही..!!

मुझें अपनी जान बना लो…अपना अहसास बना लो..सीने से लगा लो आज..मुझे अपनी रात बना लो।।

आज मुझे अपना अल्फाज़ बना लो…अपने दिल की आवाज़ बना लो..बसा लो अपनी आँखों में..मुझे अपना ख़्वाब बना लो।।

मुझे छुपा लो सारी दुनिया से..अपने एक गहरा राज बना लो..आज बन जाओ मेरी मोहब्बत..ओर मुझे अपना प्यार बना लो।।

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना, यूँ बात बढ़ा कर क्या करना, तुम मेरे थे… तुम मेरे हो, दुनिया को बता कर क्या करना।

तुम साथ निभाओ चाहत से, कोई रस्म निभा कर क्या करना, तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,फिर तुमको मना कर क्या करना।

रूठना तो हमे भी आता हैं…लेकिन मनाने कहा कोई आता हैं..घुटते रहे दर्द को पीते रहे खुद ही..फिर भी खुशियाँ सबमे बार-बार बांटता हैं..अकेले में खुद ही आशु बहाता हैं..रूठने का फायदा ही क्या..जो दिल की कही वो नहीं कोई सुन पाता हैं..

रूठे धरती का प्यास बुझा बादल उसे मनाता है..तितली और भवरो को मनाने फूल हर रोज खिल खिलाते हैं…नदियों की जिद पूरी करने के लिए पहाड़ भी रास्ता बनाता हैं..एक हम है जिसे मनाने कहा कोई आता हैं…

फूल न हो तो भवरो का क्या काम बिन बरसात मयूरी भी हो जाती उदास कैसा सावन जिसमे ना हो बरसात रूठे ही क्यों जब कोई मनाने नहीं आता हैं…

लाख दर्द के बिच भी मुस्कुराना सीखा हमने फिर कभी इश्क़ नहीं करने का कसम खाया हमने रूठना हमे भी आता हैं लेकिन मनाने कहा कोई आता हैं…

काश होता कोई राहो में साथ निभाता रूठने से पहले ही हमे मनाता करते कुर्बान पूरी जिंदगी उस पर काश कोई तो प्यार लुटाती हम पर कहने से पहले ही समझ जाता…!!

सवाल कुछ भी हो, जवाब तुम ही हो,रास्ता कोई भी हो, मंज़िल तुम ही हो,दुख कितना ही हो, खुशी तुम ही हो,अरमान कितने भी हो, आरज़ू तुम ही हो,गुस्सा कितना भी हो, प्यार तुम ही हो,खवाब कोई भी हो, उस मे तुम ही हो….!!

एक बार कर के ऐतबार लिख दो,कितना है मुझ से प्यार लिख दो,कटती नहीं ये ज़िन्दगी अब तेरे बिन,कितना और करूँ इन्तज़ार लिख दो ।

तरस रहे हैं बड़ी मुद्दतों से हम,अपनी मुहब्बत का इज़हार लिख दो,दीवाने हो जाएँ जिसे पढ़ के हम,कुछ ऐसा तुम एक बार लिख दो

भूलना चाहो तो भी याद हमारी आएगी दिल की गहराई मे हमारी तस्वीर बस जाएगी ढूढ़ने चले हो हमसे बेहतर दोस्त तलाश हमसे शुरू होकर हम पे ही ख़त्म हो जाएगी..!!

मुझको छूके मुझको छूके पिघल रहे हो तुम ,मेरे हमराह जल रहे हो तुम।चाँदनी छन रही है बादल से ,जैसे कपड़े बदल रहे हो तुम।

पायलें बज रही हैं रह रह कर ,ये हवा है कि चल रहे हो तुम।नींद भी टूटने से डरती है ,मेरे ख़्वाबों में ढल रहे हो तुम।

हो सके तो लौट आना की जान जाती हैं..हो सके लौट आना तक अभी तक उलझने बाकी हैं;

हो सके तो लौट आना तुम्हारा इन्तजार आज भी वैसा हैं..हो सके तो लौट आना की ये घबराहट आज भी हैं;

हो सके तो लौट आना की साँसे अब नहीं आती हैं, हो सके तो लौट आना की बेकरारी आज भी बाकी हैं; 

हो सके तो लौट आना ये प्यार तुम्हारे लिए आज भी  बाकी हैं…!!

जब यार मेरा हो पास मेरे,मैं क्यूँ न हद से गुजर जाऊँ,जिस्म बना लूँ उसे मैं अपना,या रूह मैं उसकी बन जाऊँ।

लबों से छू लूँ जिस्म तेरा,साँसों में साँस जगा जाऊँ,तू कहे अगर इक बार मुझे,मैं खुद ही तुझमें समा जाऊँ।

इन आँखों में इन आँखों में डूब कर मर जाऊं,ये खूबसूरत मैं काम कर जाऊं,तेरी आँखों की झील उफ़्फ़ तौबा,इन गहराईओं में मैं अब उतर जाऊं,तेरी आँखें हैं या मय के ये पैमाने हैं,पी लूं और हद से मैं गुजर जाऊं,एक शिकारा है जो तेरी आँखों में,तू कहे अगर तो इनमें मैं ठहर जाऊं,तेरी आँखों की झील सी गहराई में,जी चाहता है मेरा आज मैं उतर जाऊं।

मिलते अगर हम तो क्या एहसास होता धड़कते दिल में क्या क्या ज़ज़्बात होता बहते आँखों से आंसू, या लब खिलखिलाते या दोनों के संगम का, एक साथ एहसास होता…

करते ढेर सारी बातें, या चुप मुस्कुराते चलते साथ साथ और हाथो में हाथ होता रुकते फिर बहाने से, देखने को आखें निगाहों ही निगाहों में, उमड़ता वो प्यार होता…

बैठ कर कही, सीने से तेरे लग जाते रुक जाए अब पल यही, ऐसा विचार होता मिलते अगर हम तो क्या एहसास होता धड़कते दिल में क्या क्या ज़ज़्बात होता..।

होंठो पे अपने होंठ रख दूँ आ तुझे मैं प्यार कर लू। साँसों में साँसें घुल जाने दे बाँहों में बाहें मिल जाने दे। दो जिस्म हम, जान एक है इरादे मेरे आज नहीं नेक है।

आग लग रही है, तन-बदन में जल रहा हूँ मैं प्रेम अगन में। लबों पे अपने लब रख दूँ आ तुझे मैं प्यार कर लू।

एक दूजे में खो जाने दे मुझको तेरा हो जाने दे। आग लग रही है, तन और मन में सुलग रहा हूँ मैं, बरसते सावन में।चलो ना पूरी तरह बहक जाते है ताक़त आज अपनी आज़्माते है।

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